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Astrology : Kya Asar Hota Hai Rashiyon Par Vakri Grahon Ki Badalti Chalon Ka ?

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Astrology : Kya Asar Hota Hai Rashiyon Par Vakri Grahon Ki Badalti Chalon Ka ?
February 9, 2026 Vakri Grah,Astrology,Rashifal,Grahon Ka Prabhav,Retrograde Planets,Jyotish Shastra,Zodiac Signs,Horoscope Hindi,Grah Gochar

Astrology : Kya Asar Hota Hai Rashiyon Par Vakri Grahon Ki Badalti Chalon Ka ?

Astrology : ज्योतिष शास्त्रों में ग्रहों की चाल का खास महत्व होता है। कुछ ग्रह धीमी गति में चलते हैं, तो कुछ की चाल तेज होती है। बहुत सी बार ग्रह बहुत तेज गति से आगे बढ़ते हैं, तो कभी ऐसा होता है कि जैसे वह एक जगह रूके हुए है। ग्रह न केवल सीधी व वक्री दिशा चलते हैं बल्कि सूर्य की तरह उदय और अस्त भी होते हैं। हर साल कुछ विशेष समय पर ग्रह वक्री चाल में एंट्री करते हैं, और यह विशेष घड़ी ज्योतिष में प्रभावशाली मानी जाती है, क्योंकि इससे सभी ग्रहो की शक्ति बढ़ती है, जिससे ग्रह के प्रभाव राशियों पर बढ़ जाते है। यह प्रभाव राशियों पर सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम देना शुरू कर देते हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि कोई ग्रह वक्री अवस्था में कब प्रवेश करेगा।

सबसे पहले जानें वक्री ग्रह क्या होता है

वक्री शब्द का मतलब होता है टेढ़ा या उलझा हुआ। हर ग्रह लगातार सूर्य की परिक्रमा करता है लेकिन जब हम पृथ्वी से उनकी गति को देखते हैं, को कभी-कभी वे हमसे बहुत दूर जाते हुए लगते हैं और कभी-कभी बहुत पास भी आ जाते हैं। जब कोई ग्रह पृथ्वी और सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तो वह ग्रह हमें उल्टी दिशा में चलता हुआ दिखाई देता है। ग्रह की इस उल्टी चाल को ही ज्योतिष में वक्री गति कहते है। एक बात ध्यान रहे कि कोई भी ग्रह सच में उल्टा नहीं चलता यह केवल पृथ्वी से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है। यह ठीक वैसे ही है जैसे दो गाड़ियां एक ही दिशा में चल रही हों लेकिन जब तेज गाड़ी धीमी गाड़ी को पार करती है तो धीमी गाड़ी पीछे जाती हुई दिखाई देती है। यह सिर्फ एक Illusion की तरह है। 

2026 वक्री ग्रह की अवस्था का प्रभाव

जब कोई ग्रह सीधी चाल से वक्री चाल में और फिर वापस मार्गी चाल में आता है, तो उसका प्रभाव बदलता है। ग्रह की यह पोजिशन तय करती है कि वह मनुष्य के जीवन में पॉजिटिव या निगेटिव रिजल्ट देगा और हालांकि यह इस बात पर डिपेंड करता है कि वह ग्रह आपकी जन्म कुंडली में किस भाव में और किस स्थान में है। वक्री स्थिति में ग्रह की ज्यादा फलदायी हो जाते है, जिससे वह अपने अधिक देने लगते हैं, फिर चाहें वो शुभ हों या अशुभ यह आपकी कुंड़ली के स्थान भाव पर निर्भर करता है। आपको बता दें कि राहु और केतु ये दोनों छाया ग्रह परस्पर वक्री चाल में रहते हैं, ये कभी सीधे मार्गी नहीं होते। सूर्य और चंद्रमा ये दोनों हमेशा एकमार्गी अवस्था में रहते हैं ये कभी वक्री नहीं होते। मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि ये पांच ग्रह समय-समय पर वक्री और एकमार्गी होते रहते हैं, और इसी वजह से ये मानव जीवन पर कभी अच्छा कभी बुरा असर डालते रहते हैं। यह प्रभाव आपके कर्मो के हिसाब से भी मिलते है। साथ ही बहुत से उपाय आपकी कुंडली में ग्रह के अशुभ प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकते है।

About the Author

Dr Shalini Mehta

Dr. Shalini Mehta

Vedic Sciences Expert

Founder of Sai Kiran Institute with 30+ years of experience in Astrology, Vastu, Numerology and Palmistry.

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